Navratri 2020 [Hindi]: क्या नवरात्रि पर व्रत करना सही है?
नवरात्रि 2020 (Navratri 2020)
नवरात्रि के इस अवसर पर हम निम्न बिंदुओं पर चर्चा करेंगे जो इस प्रकार है-
- नवरात्रि 2020 किस तरह मनाना चाहिए? (How should we celebrate Navratri 2020?)
- संसार में सब देवी दुर्गा को माता कहकर क्यों पुकारते हैं? Why do all people in the world call Goddess Durga as Maa?
- देवी दुर्गा इतना श्रंगार क्यों करती है?, (Why does Goddess Durga adorn this much?)
बाकी कुछ अन्य ऐसे तथ्य हैं जो हम आगे जानेंगे।
क्या नवरात्रि पर उपवास रखना देवी दुर्गा को प्रसन्न करता है?
नवरात्रि माता दुर्गा जी को सम्मानित करने के लिए नौ दिनों तक चलने वाला महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। क्या इस नवरात्रि त्योहार को मनाने से माँ दुर्गा प्रसन्न होंगी।
Shardiya Navratri 2020:
ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा जी राक्षस महिसासुर को हराने के लिए 9 दिन तक अलग-अलग अवतार लेकर यानी नो अलग-अलग रूपों में आकर 9 दिन तक लंबी लड़ाई करी और महिषासुर का वध किया। इस कथा के आधार पर हिंदू धर्म के लोग 9 दिन तक देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और दसवे दिन विजयदशमी के रूप में मनाते हैं।
आपने कभी ऐसा सोचा है कि माता दुर्गा यह सोलह श्रंगार क्यों करती है? एक सुहागन स्त्री ही श्रृंगार करते हैं। तो दुर्गा जी भी सुहागन है और उनके पति का नाम ज्योति निरंजन है। जिन्हें काल कहा जाता है।
लोक मान्यताओ के अनुसार नवरात्रि के 9 दिनों में देवी दुर्गा के अलग-अलग 9 रूपों की पूजा की जाती है।
- नवरात्रि पहला दिन – माँ शैलपुत्री पूजा
- नवरात्रि दूसरा दिन – माँ ब्रह्मचारिणी पूजा
- नवरात्रि तीसरा दिन – माँ चंद्रघंटा पूजा
- नवरात्रि चौथा दिन – माँ कुष्मांडा पूजा
- नवरात्रि पांचवां दिन – माँ स्कंदमाता पूजा
- नवरात्रि छठा दिन – माँ कात्यायनी पूजा
- नवरात्रि सातवां दिन – माँ कालरात्रि पूजा
- नवरात्रि आठवां दिन – माँ महागौरी दुर्गा महा नवमी पूजा दुर्गा महा अष्टमी पूजा
- नवरात्रि नौवां दिन – माँ सिद्धिदात्री नवरात्रि पारणा विजय दशमी
गीता जी में व्रत करने वालों के लिए प्रभु का क्या आदेश है?
गीताजी के अध्याय 6 श्लोक 16 में स्पष्ट किया गया है कि - व्रत, उपवास (खाना ना खाने वाले) से योग साधना सिद्ध नहीं होती है अर्थात व्रत की पूर्ण मनाही की है और अधिक खाना भी मना है अधिक सोना व जागना भी साधक की साधना में बाधक है।
क्या नवरात्रि पर्व पर बली देना सही है?
जैसा कि हम जानते हैं कि नवरात्रि सालों से बनाया जाने वाला एक पर्व है इसमें अलग-अलग माताओं की मूर्तियां रखकर पूजा की जाती है व्रत वगैरह रखे जाते हैं गरबा खेला जाता है यह त्यौहार 9 दिनों तक चलता है और हर एक दिन अलग-अलग माता की पूजा की जाती है लेकिन इस समय पाखंड चरम सीमा पर पहुंच गया है और त्यौहार पर मासूम बेजुबान की बलि दी जाती है नवरात्रि ही नहीं अन्य ऐसे बहुत त्यौहार है जहां पर जुबान जानवर का कत्ल किया जाता है और इन पाखंडी और के कहने पर भोले भाले श्रद्धालु भी यह करने लग जाते हैं उनको ऐसा लगता है कि ऐसा करने से देवी दुर्गा प्रसन्न हो जाएगी लेकिन आप स्वयं ऐसा सोच कर देखिए कि उस बली वाले जानवर की जगह अपना कोई बच्चा भाई बहन की बलि भी जाए तो कैसा लगेगा जिन जानवर की बलि दी जा रही है उनका भी तो कोई होगा अगर ऐसा करने से देवी दुर्गा प्रसन्न होती है तो अपने ही संतान की बलि क्यों नहीं दी जाती है।
माता दुर्गा त्रिदेवजननी है और ब्रह्मा विष्णु महेश इनकी संताने हैं।
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दुर्गा ध्यान पड़ तिस नगरम,तां संगति डूब सब नगरम।
नवरात्रि जागरण के विषय में एक छोटा सा प्रकरण
एक कालोनी में कहीं दुर्गा का जागरण हो रहा होता है तो सारे कॉलोनी वाले वहां पर आने लग जाते हैं क्योंकि वह इस प्रकार के मीठे मीठे फिल्मी गाने गाते हैं कई प्रकार के ढोलक डीजे बजाने लग जाएंगे।
और यह सब देखकर आसपास के लोग कहेंगे कि हम भी करवाएंगे जागरण, हम भी करवाएंगे जागरण। पंडित जी हमारे भी करना यह जागरण। और फिर उन लखनडरो की मौत हो जाती है कि कमाई का साधन बढ़ गया है।
एक संत रामपाल जी महाराज जी का शिष्य था पहले थोड़ी-सी संगत थीं घर-घर जाया करते थे सत्संग करने के लिए। ऐसे ही 1 दिन संत रामपाल जी महाराज सत्संग करने के लिए गए हुए थे तो वहां एक जाते ही शुरू हो गया सारे बोलो जय माता दी, जोर से बोलो जय माता दी। उन्होंने एक टेंट सा बना रखा था तो एक भगत ने बोला कि यह जागरण हो रहा है किसी के यहां। वह जागरण शुरू हो गया था पांच सात मिनट हो गई थी। सबके बीच में गायक होता है वह बीच में खड़ा होकर जोर से बोल रहे थे सारे बोलो जय माता दी जोर से बोलो जय माता दी अगले बोलो जय माता दी पिछले बोलो जय माता दी ऐसे करते करते हुए टेंट में आ गया और बाकी लोग उन गानों को गाने लगे। वह वहां से टेंट में आकर शराब पीने लगा पी तो पहले रखा था उतर गई होगी शायद, अब फिर और पी ली उसने। ऐसे होते हैं जागरण करने वाले।
हमारे धर्म ग्रंथों में भगवान और देवी की पूजा के बारे के बारे वर्णन
हमारे धर्म ग्रंथ यह बिल्कुल स्पष्ट रूप से बताते हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश और देवी जी की पूजा करना व्यर्थ है इनकी पूजा साधना करने से हमें लाभ नहीं हो सकता है वह तो स्वयं नाशवान है वह हमारे पाप कर्म नष्ट नहीं कर सकते हैं वह तो हमारे भाई के में जो लिखा है वह ही कर सकते हैं और उनसे यह अपेक्षा करना व्यर्थ है हमें उस पूर्ण परमात्मा के साधना करनी चाहिए जिनका वर्णन हमारे धर्म ग्रंथों में किया गया है और उनका नाम कबीर साहेब है।
कबीर साहेब जी ही एकमात्र सर्वव्यापी, सर्वव्यापी, सर्वज्ञ, अविनाशी ईश्वर हैं, इन सभी का उल्लेख हमारे धर्म ग्रंथों में किया गया है और वह सभी साबित करते हैं कि वह ही पूर्ण परमात्मा है एकमात्र ईश्वर है।
पवित्र गीता अध्याय 2:17, 7:29, 8: 1, 8: 3, 8: 8-10, 15: 4, 15:17, 18: 62,64,66 में उनका नाम परम अक्षर पुरुष और कविर्देव है।
उसका भी यही विधान है कि जो साधक पूर्ण परमात्मा की साधना तत्वदर्शी संत से दीक्षा प्राप्त करके नाम सुमिरन करता हुआ तथा सांसारिक क्रिया करते हुए शरीर त्याग कर जाता है वह उस दिव्य पुरुष यानी पूर्ण परमात्मा को ही प्राप्त होता है
और हम उस परमात्मा को तभी प्राप्त कर सकते हैं जब पूर्ण संत दीक्षा लेकर भक्ति करें।
वर्तमान में कौन है तत्वदर्शी संत?
वर्तमान समय में धरती पर एकमात्र तत्वदर्शी संत केवल संत रामपाल जी महाराज जी हैं, जो हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार साधना बताते हैं।
तत्वदर्शी संत का संकेत गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में दिया गया है तत्वदर्शी संत की पहचान गीता अध्याय 15 श्लोक 1 में है यही प्रमाण पवित्र यजुर्वेद अध्याय 4 मंत्र 10 तथा 13 में दिया है।
वह एक मात्र एक ऐसे संत हैं जिन्होंने गीताजी के अध्याय 15 के श्लोक 1,4 के अर्थ को समझाने में सफल हुए हैं और यही ही तत्वदर्शी संत की पहचान है। और पवित्र गीता जी भी यही कहती है कि उस तत्वदर्शी संत की शरण में जाओ तथा इन्हीं की बताई साधना करने से पाप कर्म कर समाप्त होंगे।
संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर अपने मनुष्य जन्म का मोक्ष कराएं और यह जन्म हमें मोक्ष की प्राप्ति के लिए ही मिला है।
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और अधिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पुस्तकें पढ़ें।
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