नाथुराम गोडसे कौन था | नाथुराम गोडसे ने महात्मा गांधी को क्यों मारा? Mahatma Gandhi Jayanti
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Why did Nathuram Godse kill Bapu? |
श्रीनाथ विनायक गोडसे: भारतीय इतिहास के एक विवादित व्यक्तित्व
भारतीय इतिहास में श्रीनाथ विनायक गोडसे एक विवादित व्यक्तित्व रहे हैं। उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या की थी और इसके लिए 1948 में सजा काटी थी। इसके पीछे उनके राजनीतिक और सामाजिक विचारों के कई पहलुओं हैं, जो उन्हें एक पोलराइजड व्यक्तित्व बनाते हैं।गोडसे का जन्म २७ मई १९१० को हुआ था। उन्होंने अपने जीवन को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्पित किया और उन्होंने नाथुराम गोडसे नाम से एक संगठन बनाया था। उन्होंने विभिन्न समाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपने विचार रखे थे, जिनमें धर्म और राष्ट्र के लिए जीवन न्योछावर करने की भावना थी।१९४८ में महात्मा गांधी की हत्या के बाद, गोडसे को गिरफ्तार किया गया और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में शामिल किया गया। उन्हें गांधी की हत्या करने के आरोप में दोषी पाया गया और उन्हें १५ नवंबर १९४९ को फांसी की सजा सुनाई गई। गोडसे के कार्यों और उनके विचारों का मौलिक विवेचन करने की कोशिश करते समय, हमें यह याद रखना चाहिए कि वे एक संगीन और विवादित व्यक्तित्व रहे हैं। उनके कार्यों का आलोचनात्मक विश्लेषण और उनके विचारों का आदान-प्रदान समय के साथ बदलते रहते हैं।
महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे द्वारा हत्या कर देने के पीछे कई कारण थे। यह घातक समय भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उदार आदर्शों और राजनीतिक विवादों के दौरान घटित हुआ था। निम्नलिखित कुछ कारण थे जो इस हादसे के पीछे थे:
1. विभाजन की नीति: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के साथ विभाजन की नीति को स्वीकार किया। गोडसे ने इसे महात्मा गांधी की देशव्यापी एकता के आदर्श के खिलाफ माना और उन्होंने उन्हें देश को बाँटने के आरोप में घेरा।
2. हिंदू-मुस्लिम विवाद: विभाजन के समय हिंदू-मुस्लिम विवाद और हिंसा थी। गोडसे को लगता था कि महात्मा गांधी ने ज्यादा ध्यान दिया था मुस्लिमों की समृद्धि को और हिंदू समुदाय की भलाई को नजरअंदाज किया था।
3. खुदकुशी की दिशा: नाथूराम गोडसे के मानने के अनुसार, वे महात्मा गांधी को भारतीय समाज के लिए विशेष नुकसान पहुँचाने वाले व्यक्ति मानते थे और उनका उद्देश्य उनकी हत्या करना था।
4. राजनीतिक विरोध: गोडसे ने राजनीतिक विरोध के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को देखा। उनके लिए गांधीजी की राजनीतिक नीतियां अस्वीकार्य थीं।
5. धर्मांतरण और समर्थन: गोडसे ने हिंदू राष्ट्र के सपने को लेकर एकांतिप्रेमी दृष्टिकोण रखते थे और उन्होंने महात्मा गांधी को अपने उद्देश्यों की प्राप्ति में आधीन देखा।
6. विभाजन के दुःख: भारत के विभाजन के बाद गोडसे ने यह महसूस किया कि उनके राष्ट्र का संघठन अब नाकामियों से भरा हुआ है और वे इसे महात्मा गांधी को दोषी मानते थे।
इन कारणों के समूह ने गोडसे को उनकी नफरत और असहमति के परिणामस्वरूप महात्मा गांधी की हत्या करने की सोच में प्रेरित किया। यह घटना भारतीय इतिहास की एक अत्यंत दुःखद और अध्यात्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना बन गई है।
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★ गांधीजी के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के मन में कौन-कौन से समस्याएं थीं?
नाथूराम गोडसे के मन में कुछ मुख्य समस्याएं थीं, जिन्होंने उन्हें महात्मा गांधी के खिलाफ ले जाने का आदान-प्रदान किया। यह समस्याएं उनके विचारों और आत्मसमर्पण के साथ जुड़ी थीं, जिन्होंने उन्हें गांधीजी की विचारधारा और कार्यकलापों से असंतुष्ट किया:
1. हिंदू-मुस्लिम समस्या: गोडसे को लगता था कि महात्मा गांधी ने अपार्थेड की तरह हिंदू और मुस्लिम विभाजन को बढ़ावा दिया और विभाजन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
2. आपसी सद्भावना का विरोध: गोडसे को लगता था कि गांधीजी की आपसी सद्भावना के नारे के बावजूद, वे वास्तविकता में आपसी ताकदीर को नहीं बदल सकते थे।
3. खिलाफत आंदोलन: गोडसे को खिलाफत आंदोलन की विरोधी भूमिका थी, क्योंकि उनका मानना था कि यह भारतीय समाज के विभाजन की ओर एक पहला कदम था।
4. आजादी के प्रयासों का नाकामियों से निराश होना: गोडसे को लगता था कि गांधीजी के आजादी के प्रयासों के नाकामियों से निराश हो गए थे और उन्हें खुद आजादी के लिए कठिन प्रयास करने का समय आ चुका था।
5. हिंदू संस्कृति के संरक्षण की आकांक्षा: गोडसे को लगता था कि गांधीजी ने भारतीय समाज को पश्चिमी विचारधारा का अनुयायी बनाने की कोशिश की थी और हिंदू संस्कृति की रक्षा में विफल रहे थे।
ये थीं कुछ मुख्य समस्याएं जिन्होंने गोडसे को गांधीजी के खिलाफ उत्तेजित किया और उन्हें उनके क्रियावली की दिशा में प्रेरित किया।
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★ नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को मारने का कारण विभिन्न तथ्यों और उसके व्यक्तिगत विचारों का परिणाम था। उनके मानने के अनुसार, वे यह कार्य कुछ मुख्य कारणों के आधार पर किया:
1. हिंदू-मुस्लिम विभाजन का विरोध: नाथूराम गोडसे को लगता था कि महात्मा गांधी ने हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच विभाजन की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया, जो उनकी असंतुष्टि का कारण बन गया।
2. खिलाफत आंदोलन और खिलाफत-स्वराज नारा: गोडसे को खिलाफत आंदोलन की विरोधी भूमिका थी। उनका मानना था कि यह आंदोलन हिंदू-मुस्लिम विभाजन को बढ़ा रहा था।
3. आपसी सद्भावना का विरोध: गोडसे को लगता था कि गांधीजी की आपसी सद्भावना की नीति वास्तविकता में फल नहीं पैदा कर रही थी और देश को वास्तविक समृद्धि नहीं दिला रही थी।
4. आजादी के प्रयासों की नाकामी: गोडसे को लगता था कि गांधीजी के आजादी के प्रयासों के नाकामियों से निराश हो गए थे।
ये थे कुछ मुख्य कारण जो नाथूराम गोडसे को महात्मा गांधी को मारने के लिए प्रेरित करने वाले थे।
★ नाथूराम गोडसे लगता था कि भारतीय राजनीति और समाज को कैसे सुधारना चाहिए?
नाथूराम गोडसे का विचार था कि भारतीय राजनीति और समाज को उनके दृष्टिकोण से सुधारने के लिए कुछ मुख्य तत्व थे। वे निम्नलिखित विचारों को महत्वपूर्ण मानते थे:
1. हिंदू राष्ट्र की आवश्यकता: गोडसे को विश्वास था कि भारत एक हिंदू राष्ट्र होना चाहिए और उसे विभाजन के बाद भी हिंदू समुदाय को एकत्रित करने की आवश्यकता थी।
2. आधुनिकीकरण और स्वतंत्रता: उन्हें विचार किया कि भारत को वैश्विक तंत्र में स्थान बनाने के लिए वहाँ का समाज और राजनीति को आधुनिकीकृत करने की आवश्यकता है।
3. समाज के विकास के लिए कठिन कदम: गोडसे को लगता था कि भारतीय समाज को अपार्थेड के आदान-प्रदान के बावजूद अपने विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कठिन कदम उठाने चाहिए।
4. विवेकानंद के विचारों का अनुसरण: गोडसे ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को महत्वपूर्ण माना और उनके उपदेशों के आधार पर भारतीय समाज को विकसित करने की कल्पना की।
ये थे कुछ मुख्य तत्व जो नाथूराम गोडसे को भारतीय राजनीति और समाज के सुधार के लिए महत्वपूर्ण मानते थे। उनकी दृष्टि के अनुसार, ये परिवर्तन उनके देश के लिए आवश्यक थे।
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★ नाथुराम गोडसे का मानना था कि हिंदू राष्ट्र का आदान-प्रदान कैसे कर सकता है?
नाथूराम गोडसे का मानना था कि हिंदू राष्ट्र का आदान-प्रदान करने के लिए कुछ मुख्य तत्व थे जो उनके विचारों का हिस्सा बनते थे:
1. समुदायिक एकता: उन्हें लगता था कि हिंदू समुदाय को एकत्रित करने की आवश्यकता है ताकि वे एक विशाल और सक्रिय राष्ट्र की नींव रख सकें।
2. धर्म और संस्कृति के प्रशासन में समर्पितता: उन्होंने धर्म और संस्कृति के महत्व को समझाया और उनका समर्पित अध्ययन और प्रचार-प्रसार का पक्षपातिपूर्ण रूप से प्रशासन करने की सलाह दी।
3. विदेशी तत्त्वों का विरोध: गोडसे को लगता था कि भारतीय समाज को विदेशी तत्त्वों के नकली असरों से बचाने के लिए एक विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
4. शिक्षा और शोध का प्रमुख रूप से समर्पित रहना: उन्होंने शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में हिंदू जनता को समर्पित रहने का सलाह दिया ताकि वे विश्व में आगे बढ़ सकें।
5. समाज की जागरूकता और संगठन: गोडसे को लगता था कि समाज को उठाने के लिए जागरूकता और समुदाय के सदस्यों को संगठित करने की आवश्यकता है।
इन तत्वों के माध्यम से नाथूराम गोडसे ने भारत को हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए अपने विचार और प्रतिबद्धता का प्रकट किया।
★ नाथुराम गोडसे के अनुसार, भारत के विकास के लिए सही रास्ता क्या था?
नाथुराम गोडसे के अनुसार, भारत के विकास के लिए सही रास्ता विभिन्न तत्वों पर आधारित था जो उनके विचारों का हिस्सा बनते थे:
1. हिंदू समुदाय की एकता: गोडसे का मानना था कि हिंदू समुदाय को एकत्रित करने की आवश्यकता है ताकि वे एक सशक्त और एकत्रित राष्ट्र की नींव रख सकें।
2. धर्म और संस्कृति के महत्व को समझाना: उन्होंने धर्म और संस्कृति के महत्व को समझाया और उनका समर्पित अध्ययन और प्रचार-प्रसार का पक्षपातिपूर्ण रूप से प्रशासन करने की सलाह दी।
3. विदेशी तत्त्वों का विरोध: गोडसे को लगता था कि भारतीय समाज को विदेशी तत्त्वों के नकली असरों से बचाने के लिए एक विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
4. शिक्षा और शोध का प्रमुख रूप से समर्पित रहना: उन्होंने शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में हिंदू जनता को समर्पित रहने का सलाह दी ताकि वे विश्व में आगे बढ़ सकें।
5. समाज की जागरूकता और संगठन: गोडसे को लगता था कि समाज को उठाने के लिए जागरूकता और समुदाय के सदस्यों को संगठित करने की आवश्यकता है।
इन तत्वों के माध्यम से नाथुराम गोडसे ने भारत के विकास को उनके दृष्टिकोण से सुधारने के लिए अपने विचार और प्रतिबद्धता का प्रकट किया। उनके अनुसार, ये कदम उनके देश के लिए उचित थे।
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