Raksha Bandhan 2020[Hindi]: रक्षाबंधन पर जानिए कौन है हमारा वास्तविक रक्षक?



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Raksha Bandhan 2020[Hindi]: रक्षाबंधन पर जानिए 

कौन है हमारा वास्तविक


रक्षा बंधन 2020 (Raksha Bandhan Hindi): 

रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्यौहार भाई बहनों का प्रमुख त्योहार माना जाता है। यह भारत के साथ-साथ अन्य हिंदू देश नेपाल आदि में भी मनाया जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर एक धागा बांधती है जिसे राखी कहा जाता है। और भाई बहन के जीवन भर रक्षा करने का वचन देता है। आज हम जानेंगे वह अद्भुत विधि जिससे परमेश्वर हमारी रक्षा स्वयं करेंगे।


Raksha Bandhan 2020:  रक्षाबंधन कब है? 

Raksha Bandhan 2020: राखी का त्यौहार श्रावण महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है और इसी कारण इसे कहीं जगह पर राखी पूर्णिमा भी कहा गया है।
इस साल रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) 3 अगस्त को मनाया जाएगा।

Raksha Bandhan: रक्षाबंधन का अर्थ रक्षा करने वाला बंधन यानी धागा है। जिसे बहने अपने भाई की कलाई पर बांधती है। और भाई उनकी जीवन भर रक्षा का वचन देते है।



भाई बहन का अनमोल रिश्ता

भाई बहन का रिश्ता बहुत ही अनमोल माना गया है। बचपन से ही एक दूसरे के साथ खेलते, लड़ते झगड़ते बड़े हुए हैं। यदि उनकी उम्र में अंतर होता है तो वहां अपने से छोटे काम माता-पिता तरह देखभाल करते हैं। बड़ी शैतानी के साथ यह रिश्ता उम्र के साथ-साथ मजबूत होता चला जाता है। बड़े भाई अपनी बहनों के प्रति बहुत प्यार और संवेदनशील होते हैं बहुदा माता-पिता ना होने पर भाई उनकी तरह बहुत प्यार से संवेदनशीलता से इनकी देखभाल करते हैं।

रक्षाबंधन मनाने का प्रचलन

रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई की कलाई पर एक धागा बांधती है, जिसे राखी कहा जाता है। फिर बहने अपने भाई को तिलक लगाती है। मिठाई खिलाते हैं। और भाई उन्हें उपहार देते हैं और जीवन भर उनकी रक्षा और देखभाल करने का वचन देते हैं। यहां पर यह बात जानना आवश्यक है कि यह राखी बांधने से भाई की रक्षा हो सकती है जो भाई के किस्मत के दुख टल सकते हैं फिर तो ऐसे संसार में कोई दुर्घटना ही नहीं होनी चाहिए। आइए जानते हैं हम रक्षाबंधन के इस त्यौहार की वास्तविकता।

यदि हम रक्षाबंधन के इतिहास को देखें तो यह मात्र 6000 वर्ष पुराना है इससे पहले बहने अपने भाइयो के राखी नहीं बांधती थी, तब भी उनकी रक्षा होती थी।


क्या रक्षाबंधन मनाना चाहिए?

अभी रक्षाबंधन का त्यौहार आने वाला है यह क्यों मनाया जाता है इसकी क्या जरूरत है। यह काल द्वारा चलाए गए समय बर्बाद करने, टाइम पास करने के लिए, हमें पीड़ित रखने के लिए एक रीति बना रखी है। इस ज्ञान से परिचित हो जाने के बाद हमारी आंखें खुल जाती है और समझदार व्यक्ति इस बात को स्वीकार कर लेते हैं कि संत जो कहते हैं वह परमेश्वर का आदेश होता है। फिर वह समाज की नहीं मानते है

एक बहन ने बताया कि उपदेश लेने से पहले मैं अपने भाई को राखी बांधने के लिए गई। रक्षाबंधन के दिन अपने भाई का इंतजार कर रही थी। वह तो नहीं आया लेकिन दुर्घटना होने से उसका शव घर आया। जोर जोर से रो रही थी।


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रक्षाबंधन का उद्देश्य

रक्षाबंधन का उद्देश्य यह है कि कि भाई अपनी बहन की रक्षा करेगा। फिर भाई की रक्षा कौन करेगा। हमारा रक्षक कोई और है उन्हें हम भूल चुके हैं। हम सब का रक्षक पूर्ण ब्रह्म कबीर परमात्मा है।


कौन है हमारा वास्तविक रक्षक और हमें राखी किसको बांधनी चाहिए?

हम सभी भाई बहनों को मिलकर कबीर परमात्मा को बांधना चाहिए रक्षा बंधन। जिससे भाई और बहन दोनों की रक्षा हो जाए।
कबीर साहिब जी के रक्षाबंधन कैसे बन्देगा, जब हम उनकी शरण में आ जाएंगे
जो जाकी शरण बसै, ताको ताकि  लाज ।
जल सोही मछली चढ़े, बह जत है गजराज ।।

हमें अपने परमात्मा को राखी बांधनी चाहिए


जिन भाइयों के बहन नहीं है वह राखी कैसे बनाएगी

राखी एक और दुख पैदा करती है यह। जिन बहनों के भाई नहीं है वह रोती है इस दिन । अपने चाचा के मामा के ताऊ के बहनों के मुंह की तरफ ताकेंगे और फिर वह सोचेंगे कि यह पैसे लेने के खातिर यहां आ जाती है चाहे वह ना कहे लेकिन मन में जरूर आ जाएगा।
यह तो काल भगवान ने उल्टी रीति बना रखी है और हम इस काल के जाल में इतना फंस गए है और समाज बन गया है इस समाज के अनुकूल हमे सुविधाएं नहीं मिलती ओर फिर हम बहुत परेशानियां होती है


रक्षाबंधन बनाने का वास्तविक तरीका

रक्षाबंधन का त्योहार कैसे बनाना है, परमात्मा का नाम ले लेना है और यह जो रीति रिवाज हैं यह हमें पीड़ित करने के खातिर है, एक दूसरे से दूर करने वाली है अब यह रिवाज बन गई है बहन राखी बांधने के लिए आएगी उसको कुछ देना पड़ेगा यह एक मजबूरी सी बन गई यह भी हमारे बीच में दरार पैदा करती है जिन्होंने परमात्मा को पाना है उन्हें परमात्मा का विधान मानना ही पड़ेगा।


रक्षाबंधन पर अपनी बहन को यह दे अनमोल तोहफा

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Based on the knowledge of Sant Rampal Ji Maharaj

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